STORYMIRROR

Tanmay Mehra

Abstract

3  

Tanmay Mehra

Abstract

सब मिट्टी हो जाता है

सब मिट्टी हो जाता है

1 min
426

ना कर तेरा मेरा

एक दिन सब मिट्टी हो जाता है

रह जाता है यही सब

क्यौं तू मोह माया के

बीज बो जाता है।


तू मरता रहा पल पल

जिन अपनों के लिये 

वो तेरी अर्थी पर आके

दो आँसू रो जाता है

ना कर तेरा मेरा

एक दिन सब

मिट्टी हो जाता है।


ये कहकशाँ ये

महफिलें तू सजाता रहा

पर आखिरी सांस में

इंसान अकेला सो जाता है

सत्कर्म कर सत पथ पर चल

क्यों झूठी शान

मोह माया में खो जाता है।


ना कर तेरा मेरा

एक दिन सब मिट्टी हो जाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract