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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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सब कुछ बदलेगा

सब कुछ बदलेगा

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जीवन की बदनाम गलियों से

बचकर निकलना मुश्किल है।

कुछ खुद ही दाग दामन पर

तो कुछ लोग भी लगा देते हैं।


है आसान नहीं पाक साफ़ निकलना

ये दुनिया पल पल तोहमतें लगाती है।

जिंदा को कौन पूछे मरने के बाद भी

सताती है।


है यह दुनिया दुनिया तो क्या

यह किसी को भी नहीं छोड़ती है।

करते रहो मरते रहो जिसके लिए

वही वक्त बेवक्त अकड़ता है।


निकल रही हो दर्द की कराह तो क्या

तेरे दर्द से किसी को फ़र्क नहीं पड़ता।

यहां सबकुछ सहना पड़ता है

तेरी तड़प है तू ही जाने..

तेरे दर्द से किसी को फ़र्क नहीं पड़ता।

पल पल हर पल सबकुछ बदलते रहता है।


सबकुछ बदलते रहता है।


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