**सौहार्द प्रेम की बहे बयार*
**सौहार्द प्रेम की बहे बयार*
बूंदें बारिश की कण-कण में समाई
बादल ने जैसे ली हो अँगड़ाई ,
कभी इस पार तो कभी उस पार
सौहार्द प्रेम की बहे बयार।
सौंदर्य से धरा भी तो इठलाई
हरे रंग सी छाई है तरुणाई,
बूंदें आलिंगन कर रही बार-बार
सौहार्द प्रेम की बहे बयार।
छम-छम पायल सी छनकाई
मोहित करने बरखा रानी आई,
मैं खड़ी रही आँचल को पसार
सौहार्द प्रेम की बहे बयार।
पुष्प खिले तो कलियाँ इतराई
प्रेम प्रदर्शन से जैसे शरमाई,
"नीतू" कलियों का देखे श्रृंगार
सौहार्द प्रेम की बहे बयार।
