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Arti Shrivastava

Abstract

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Arti Shrivastava

Abstract

साथी

साथी

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चले थे, हम साथ - साथ

अब राहें बदल गईं,

पकड़े थे हाथों में हाथ,

अब निगाहें बदल गईं।


वो जज़्बात, वो नज़र

ना जाने कहां गए,

अब ना तो वो, वो हैं

और ना हम, हम हैं


क्योंकि अब हमारी

ज़िन्दगी बदल गईं।


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