सार्थक जीवन
सार्थक जीवन
ये जिंदगी भी कैसी बेहाल है
कोई यहां दौड़ता कछुए की तो
कोई खरगोश की चाल है
क्या दौड़ना ही जीवन है
क्या जो दौड़ता हुआ दिख रहा है
वह हमेशा जीतता ही है ?
जो संभलकर चलता है वह जीतता नहीं ?
चलो इस खरगोश कछुए के रेस से बाहर आए
जिंदगी में कुछ पल सबके साथ बिताए
जिंदगी को और बेहतर बनाएं
दौड़ना न जीवन था न होगा
अतः हम सभी को सार्थक जीवन जीना होगा।
