STORYMIRROR

Archna Goyal

Abstract

3  

Archna Goyal

Abstract

सारा संसार अपना परिवार

सारा संसार अपना परिवार

1 min
316

हर आँख का सपना हो इस धरा पर


अब सर्व संसार अपना हो इस धरा पर


सुख दुख बाँट के चले परिवार में हम सब


कोई काम न नाट के चले संसार में हम सब


किसी दिल को न ठेस पहुँचे गलती से भी


किसी दिल में न शोला दहके किसी के लिए


अपने चित को विशाल रखो कहते है सभी


चित में प्रेम का ना अकाल रखो अपने कभी


क्या रखा है जात पात को मानने में मेरे भाई


अब तो भलाई सभी की है इसे टालने में मेरे सांई


ये तेरा ये मेरा करते करते यहाँ मर जाएगे सभी


अहम में आकर दुष्ट संस्कारो को स्वाहा कर जाएगे


ले कसम सबका एक मजहब धरती पर कर जाएगे


वसुधैव कुटुम्बकम का एक मात्र धर्म हम अपनाएगे ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract