Minal Aggarwal
Abstract
मौसम सर्द होता है तब
सांस नहीं आती है
कोई पल रेशमी हवा सा न बहता तब
सांस रुक जाती है
कुछ कुछ जब अपनी पसंद का
अपने मन का होने लगता है तब
एक नई सुबह के
नये सूरज की
गर्म लहर जो
तन को गरमाती है तब
कहीं जाकर सांस में सांस आती है।
एक मधुर तरंग ...
आकाश की काली ...
एक सफेद उज्जव...
एक अमृत के ना...
एक बैंगनी रंग...
एक गुलाब सी ग...
ऐ सूर्य तुम स...
एक बड़े हरे प...
कंचई नीले रंग...
लाल फूलों से ...
मैं अध्यापक हूं निजी संस्थान का, दुत्कारी से डर लगता है। मैं अध्यापक हूं निजी संस्थान का, दुत्कारी से डर लगता है।
पुराने बक्से के कोने में आज भी वही ख़ुशबू महफूज़ है । पुराने बक्से के कोने में आज भी वही ख़ुशबू महफूज़ है ।
यह आईना तो मेरे जीवन के ऊंचे नीचे पड़ावों का साक्षी है ! यह आईना तो मेरे जीवन के ऊंचे नीचे पड़ावों का साक्षी है !
शब्दों का जामा ओढ़े रहती कहती है खुद को वो एक कविता। शब्दों का जामा ओढ़े रहती कहती है खुद को वो एक कविता।
आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू। मन के अंदर कहीं दर्द के साथ आँसू। आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू। मन के अंदर कहीं दर्द के साथ आँसू।
साहस, त्याग, दया और ममता, इनकी स्वामिनी कहलाती हूँ। हाँ मैं नारी हूँ। साहस, त्याग, दया और ममता, इनकी स्वामिनी कहलाती हूँ। हाँ मैं नारी हूँ।
आते हैं शुचि भाव, हमेशा तब ही कवि मन।। आते हैं शुचि भाव, हमेशा तब ही कवि मन।।
मैं तुम्हें बनाता हूँ ? या तुम मुझे बनाते हो ? मैं तुम्हें बनाता हूँ ? या तुम मुझे बनाते हो ?
रब मेरे अब तो मिटा दे यह दूरी और मजबूरी अब तो मिटा दे यह दूरी और मजबूरी। रब मेरे अब तो मिटा दे यह दूरी और मजबूरी अब तो मिटा दे यह दूरी और मजबूरी।
कान्हा नाचे फन पर उसके ओर सारा क्रोध उतारे। छोड़ दें अब स्थान यहां का और अपने प्राण कान्हा नाचे फन पर उसके ओर सारा क्रोध उतारे। छोड़ दें अब स्थान यहां का ...
ये जीवन दुख का सागर है मन को न मिलता, यहाँ पर सुुख । ये जीवन दुख का सागर है मन को न मिलता, यहाँ पर सुुख ।
नारी अपने पति का अपमान सह न पाए शिव घूम रहे सती का शरीर उठाए नारी अपने पति का अपमान सह न पाए शिव घूम रहे सती का शरीर उठाए
हंसना भी चाहे वो, पर हंस नहीं पाते हैं। खुशियों की इस दुनिया में, दुख कहां से आत हंसना भी चाहे वो, पर हंस नहीं पाते हैं। खुशियों की इस दुनिया में, दु...
बचपन था मेरा बड़ा ही प्यारा , एक बड़ा था परिवार हमारा । बचपन था मेरा बड़ा ही प्यारा , एक बड़ा था परिवार हमारा ।
रजत वर्ण ऊन की चादर ओढ़े दिखते खेत खलिहान बाड़ियों में। रजत वर्ण ऊन की चादर ओढ़े दिखते खेत खलिहान बाड़ियों में।
ये होती उसी की दिवानी है जिसे पाना मुश्किल-ए- ज़िन्दगानी है। ये होती उसी की दिवानी है जिसे पाना मुश्किल-ए- ज़िन्दगानी है।
पर दिये है ख़ुदा ने मेरी उड़ान अभी जारी है! पर दिये है ख़ुदा ने मेरी उड़ान अभी जारी है!
मां सहनशक्ति की मिसाल है मां धरती पर भगवान है। मां सहनशक्ति की मिसाल है मां धरती पर भगवान है।
और बाँट देता है हम जैसों में मीठी नींद की सौगातों को। और बाँट देता है हम जैसों में मीठी नींद की सौगातों को।
होते हैं कुछ लोग सपने लेके सोते हैं। होते हैं कुछ लोग सपने लेके सोते हैं।