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dr. kamlesh mishra

Inspirational

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dr. kamlesh mishra

Inspirational

साहस

साहस

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धरती पर चलती चीटी ,

साहस कैसा रखती है।

लघु जीवन है उसका,

पर पथ से नहीं भटकती है।


कोई ऐसा छोर नहीं है,

जिस ओर है उसकी डोर नहीं।

कण-कण उसका अपना है,

वही तो उसका सपना है।


जब दाना लेकर चलती है,

तब गिरती और सँँभलती है।

लाखों दुश्मन है इसके,

पर तनिक न उससेे डरती है।


करती है जीवन यापन,

घोर श्रम से अपना।

अनुुुपम है प्रकृृति की,

काले तम सी रचना।


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