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Anusuya Choudhary

Abstract

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Anusuya Choudhary

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सादगी

सादगी

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सादगी की मिसाल हो तुम तो।

खुशबुओं के ख़याल हो तुम तो।


दिल के दागों को कर दिया रोशन, 

एक टीका गुलाल हो तुम तो।


पूरे कमरे में छा गए, क्या ख़ूब? 

इत्र भीगा रूमाल हो तुम तो।


मेरे मग़रिब-जनूब हो तुम तो, 

मेरे मशरिक-शुमाल हो तुम तो।


जिसकी दुनिया बड़ी अकेली है, 

उन मुरीदों का हाल हो तुम तो।


सारे हाज़िर जवाब गुमसुम हैं,

ऐसे हाज़िर सवाल हो तुम तो।


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