STORYMIRROR

Anusuya Choudhary

Abstract

4  

Anusuya Choudhary

Abstract

आहिस्ता चल जिंदगी

आहिस्ता चल जिंदगी

2 mins
275

आहिस्ता चल ज़िन्दगी

कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है

कुछ दर्द मिटाना बाकी है

कुछ फर्ज़ निभाना बाकी है

रफ़्तार मे तेरे चलने से कुछ रूठ गए


कुछ छुट गए

रूठो को मनाना बाकी है

रोतो को हँसाना बाकी है

कुछ हसरते अभी अधूरी है

कुछ काम अभी और ज़रूरी है


ख्वाईशें जो घुट गयी है दिल मे

उनको दफनाना बाकी है

कुछ रिश्ते बन कर टूट गए

कुछ जुड़ते जुड़ते छुट गए

उन टूटे छूटे रिश्तों के ज़ख्मों को

मिटाना बाकी है


तू आगे चल , मै आता हूँ 

क्या छोड़ तुझे ज़ी पाऊँगा ?

इन साँसों पे हक़ है जिनका

उनको समझाना बाकी है

आहिस्ता चल ज़िन्दगी

कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract