STORYMIRROR

शशि कांत श्रीवास्तव

Abstract

3  

शशि कांत श्रीवास्तव

Abstract

"ऋतु राज वसंत "

"ऋतु राज वसंत "

1 min
355

हो गया है आगमन इस वसुधा पर 

मदमस्त ऋतु -ऋतु राज वसंत का,

करने को स्वागत ऋतु राज वसंत की 

सज गई है पर्ण विहीन सूनी डाली 


नव सुकुमार रक्तिम पलल्व से 

और ,वहीं पुष्प लतायें अट गई हैं 

रंग बिरंगे पुष्पों से तो 

वसुंधरा ने ओढ़ी चादर 

पीली सरसों के पुष्पों की 


करने को स्वागत ऋतु राज वसंत की 

रोज सवेरे, मधुर कंठ से गान सुनाती 

मानव से शर्माने वाली 


कुहुक कुहुक कर गाने वाली 

वो है काली कोयल रानी 

करती है स्वागत ऋतु राज वसंत की।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract