Komal Talati "Shashi"
Abstract Inspirational
सुबह की एक रोशनी
रोशन करती जहाँ
हर दिन एक नए
पैगाम के साथ
कुछ न कुछ नया
हे सब के लिए बस
सही नजरिये की है
जरूरत ! मायूस ना हो
खिलखिलाकर जीओ...
थोड़ी सी में ...
रोशनी...
बैरी चाँद..
काश मैं कुछ कर पाती, अपने हाथों से किनारों की दूरियां मिटाती। काश मैं कुछ कर पाती, अपने हाथों से किनारों की दूरियां मिटाती।
आज नहीं तो कल ही सही, कहीं न कहीं तो मिल ज्याएगी ए दुनिया ! आज नहीं तो कल ही सही, कहीं न कहीं तो मिल ज्याएगी ए दुनिया !
जिससे देश बनता है सुदृढ़, समृद्ध और यशश्वी। जिससे देश बनता है सुदृढ़, समृद्ध और यशश्वी।
बरसेगी अग्नि प्रलय जो प्रकृति का नहीं करोगे मान। बरसेगी अग्नि प्रलय जो प्रकृति का नहीं करोगे मान।
हमारी उंगलियों से ज्यादा, मुठ्ठियों में ताकत होती हैं। हमारी उंगलियों से ज्यादा, मुठ्ठियों में ताकत होती हैं।
ऐ ज़िन्दगी तू जो साथ चले तो एक और एक ग्यारह भी असंभव नहीं ! ऐ ज़िन्दगी तू जो साथ चले तो एक और एक ग्यारह भी असंभव नहीं !
अन्यथा याद रखो प्रलय मुझमें ही रहता है कहीं। अन्यथा याद रखो प्रलय मुझमें ही रहता है कहीं।
साथ पाकर तुम्हारा मुसीबतें मुंह मोड़ लेंगी जिंदगी में अपनी बरकत शुरू होगी साथ पाकर तुम्हारा मुसीबतें मुंह मोड़ लेंगी जिंदगी में अपनी बरकत शुरू होगी
अपने विनाश का तू खुद ही जिम्मेदार बन रहा अपने विनाश का तू खुद ही जिम्मेदार बन रहा
मुरझाये फूलों से सीखूं कैसे मैं हँसूँ निरखूँ? खुद के खंजर से ही क्या खुद के प्राण लूँ मुरझाये फूलों से सीखूं कैसे मैं हँसूँ निरखूँ? खुद के खंजर से ही क्या ख...
ज़िन्दगी का राज़ क्या है,क्या करेंगे जानकर क्यों मिला मानुष जनम, जब राज़ यह जाना नहीं। ज़िन्दगी का राज़ क्या है,क्या करेंगे जानकर क्यों मिला मानुष जनम, जब राज़ यह जाना नह...
स्वर्ण उषा की लाली देखो नव प्रभात मन सुरभित कर लो। स्वर्ण उषा की लाली देखो नव प्रभात मन सुरभित कर लो।
तेरी चीखों से आनंद ये लेगी, नाटक ही समझेगी तेरा आचार। तेरी चीखों से आनंद ये लेगी, नाटक ही समझेगी तेरा आचार।
पहले अग्नि को प्रज्वलित करा जाता है उसके बाद आता फाग है ! पहले अग्नि को प्रज्वलित करा जाता है उसके बाद आता फाग है !
उन तक कभी नहीं पहुँचाते बस अपने आपको अपने मन को समझते हैं। उन तक कभी नहीं पहुँचाते बस अपने आपको अपने मन को समझते हैं।
पूर्वाग्रह सब तोड़ के नदियाँ है तो जीवन है कानों में गुनगुनाती। पूर्वाग्रह सब तोड़ के नदियाँ है तो जीवन है कानों में गुनगुनाती।
लक्ष्मी जी का दुलारा, फिर भी कितना निर्मल इतना कोमल कितना प्यारा। लक्ष्मी जी का दुलारा, फिर भी कितना निर्मल इतना कोमल कितना प्यारा।
थे देशभक्त फिर भी वो सारे, उस जंगल का कानून बड़ा निराला था। थे देशभक्त फिर भी वो सारे, उस जंगल का कानून बड़ा निराला था।
वो मेरे हर अर्थ से परिचित है जो सब कुछ अलिखित है। वो मेरे हर अर्थ से परिचित है जो सब कुछ अलिखित है।
हर नज्म, हर शेर, हर ग़ज़ल में पाकर खुदको, वो हमसे बदले की भीख मांगते रह गए। हर नज्म, हर शेर, हर ग़ज़ल में पाकर खुदको, वो हमसे बदले की भीख मांगते रह गए।