STORYMIRROR

प्रीति प्रभा

Abstract

4  

प्रीति प्रभा

Abstract

रंग

रंग

1 min
366

उसे सफ़ेद रंग में

मैं बहुत ज्यादा अच्छी लगती थी

ये रंग और मेरी सादगी जो है बेरंग

उसके होने से ज़िन्दगी रंगीन थी


अब उसके जाने के बाद

कोई भी रंग पहन लूंँ मैं पर

ये ज़िन्दगी बेरंग लगती है

उसका इरादा शायद 


मुझे बेरंग करने का था

इसीलिए उसे मैं सफ़ेद रंग में

ज्यादा अच्छी लगती थी

रंग भर कर के भी बेरंग हूंँ मैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract