रंग फागुन के
रंग फागुन के
बरस रहे हैं रंग फागुन के,
अंग-अंग मोरा रंगा पिया से,
बरस रहे हैं रंग फागुन के।।
लाल रंग हिय प्रेम जगावे,
हरा रंग मोरा जिया हर्षावे,
रंग गुलाबी लाज शरम के
इन्द्रधनुष-रंग बरसे पिया से,
बरस रहे हैं रंग फागुन के-2।।
प्रेम से प्रीतम मारे पिचकारी,
भींगे अंगिया भींगी रे सारी,
सुध-बुध खोई धरी अंकवारी,
प्रेम के रंग रंगी हाए पिया से,
बरस रहे हैं रंग फागुन के-2।।

