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Vishu Tiwari

Abstract Romance Classics

4  

Vishu Tiwari

Abstract Romance Classics

रंग फागुन के

रंग फागुन के

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बरस रहे हैं रंग फागुन के,

अंग-अंग मोरा रंगा पिया से,

बरस रहे हैं रंग फागुन के।।


लाल रंग हिय प्रेम जगावे,

हरा रंग मोरा जिया हर्षावे,

रंग गुलाबी लाज शरम के 

इन्द्रधनुष-रंग बरसे पिया से,

बरस रहे हैं रंग फागुन के-2।।


प्रेम से प्रीतम मारे पिचकारी,

भींगे अंगिया भींगी रे सारी,

सुध-बुध खोई धरी अंकवारी,

प्रेम के रंग रंगी हाए पिया से,

बरस रहे हैं रंग फागुन के-2।।


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