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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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रक्षकों को नमन

रक्षकों को नमन

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शीत-घाम-वर्षा सहते नित हंसकर

हरा-भरा रखते ये वतन रूपी चमन।

सीमा प्रहरी-कोरोना योद्धाओं तुमको

अंत:स्तल से है कोटिश: हार्दिक नमन।


निज घर में सब रहें सुरक्षित और स्वस्थ

खुद दुख सहकर करते हो तुम वही जतन।

सुरक्षा देश- देशवासियों की तुमको प्यारी

हे राष्ट्ररक्षकों तुम्हें है कोटिश: हार्दिक नमन।


बाधाओं के पथ में सीना तान अचल अटल

सुदृढ़ प्राचीर के सम तुम निर्भय डट जाते हो।

कुदरत- मानव निर्मित हर आफत सहने वाले

सबके रक्षक- संरक्षक तुमको है कोटि नमन।


तुम हर आजादी के सच्चे- अच्छे रखवाले हो

मानवता और देश की गरिमा के प्यारे रक्षक।

कर सकें उऋण जो ऋण से तुम्हरे-वे शब्द नहीं

 भावपूर्ण श्रद्धा से कोटि-कोटि है तुमको नमन।


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