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भाऊराव महंत

Inspirational

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भाऊराव महंत

Inspirational

रक्षक बनें भक्षक

रक्षक बनें भक्षक

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हाय! रक्षक बन गए,

विकराल भक्षक; क्या करें?


घर हमारे रह रहे जो काल बनकर। 

डस रहे अपनी सुता को व्याल बनकर। 

वासना में लिप्त हो दुष्कर्म करके- 

छा गए सिर वेदना विकराल बनकर।


बंद रखना ही पड़ेगा गेह पक्षक; क्या करें?

हाय! रक्षक बन गए, विकराल भक्षक; क्या करें?


आपको उपमान दे दूँ व्याध की मैं। 

क्या सज़ा दूँ आपके अपराध की मैं?

भर्त्सना करता रहूँगा रोज़ लेकिन-

आपके मन की घृणित इस साध की मैं। 


दूध पी जब बन गए विषयुक्त तक्षक; क्या करें?

हाय! रक्षक बन गए, विकराल भक्षक; क्या करें?


दुष्ट को कमज़ोर दिखता आदमी जब। 

और आँखों में रहे केवल नमी जब। 

आत्मघाती बन कपट से घात करता-

देखता है आत्मरक्षा की कमी जब। 


अब स्वयं बनना पड़ेगा आत्मरक्षक; क्या करें?

हाय! रक्षक बन गए, विकराल भक्षक; क्या करें?


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