STORYMIRROR

Neetu Lahoty

Abstract

4  

Neetu Lahoty

Abstract

रिश्तों की दिवाली

रिश्तों की दिवाली

1 min
199

चलो आज रिश्तों की दिवाली मनाते हैं

कुछ दिये दिल में जलाते हैं

जो छाया है तिमिर मन में

क्षोभ का, दुःख का,

अकेलेपन का उसे भगाते हैं।


मोबाइल पर बहुत निभा लिये रिश्ते

चलो आज किसी के घर चलते हैं 

किसी रोते को हँसाते हैं

किसी का दर्द कम करते हैं

चलो आज रिश्तों की दिवाली मनाते हैं।

 

कुछ पल अपनों के साथ गुजारते हैं

मौसी को लाड लड़ाते हैं

तो भुआ को खुब चिढ़ाते हैं

चलो आज सब भूल कर बच्चे बन जाते हैं

चलो आज रिश्तों की दिवाली मनाते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract