राष्ट्रप्रेम गीत (34)
राष्ट्रप्रेम गीत (34)
है हमारे जवानों का , सीना बड़ा।
दुश्मनों सामने आना , सोच समझ।।
तुमने भूले से भी , पग बढ़ाया अगर।
जा ना पाओगे वापिस ,अभी सोच लो।।
मेरे सैनिक डटे हैं , मैदाने जंग।
बाहु उनकी फड़कती , तुम्हारे लिए।
तुमने भूले से भी , आंगे रख्खा कदम।
तीसरा नेत्र उनका , तुम्हारे लिए ।।
बच न पाओगे , चाहे जल में डूब लो
बंकरो में बचोगे , नहीं जाके छुप।।
नभ से तुमको झपट ले, हम बाज की तरहा
भूल करना नहीं , बेटा आने की तुम।।
तुम समझते हो अपने को , तीस मार खां।
हम मिला दे महीं , जो नजर में दिखे।।
मौत का जो निमंत्रण , हो स्वीकार तुम।।
हम तो बैठे तुम्हारी ही , चाहत लिए।
