STORYMIRROR

karan ahirwar

Abstract Thriller

3  

karan ahirwar

Abstract Thriller

राहों में

राहों में

1 min
247

खुद से राहों में

ठोकर कौन लगाता है

जो गिर जाए तो

आकर कौन उठाता है


मेरी खुशनसीबी की

तू नहीं है पास मेरे

वरना कांटों से

इश्क कौन लड़ाता है


तेरी वफादारी

मेरी जीवन की एक सीख है

वरना मंज़िल को

राहों से दूर कौन भगाता है



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract