Dr Lalit Upadhyaya
Abstract
जब मैं नहीं होता तब वो रोती,
अँखियों में भर लाती आंसू के मोती।
सबको खाना खिलाकर तब वो सोती,
माँ ही ऐसी हमारी होती।
माँ का यही है प्यार,
नहीं चुका सकते उधार,
भव सागर के जाना है पार,
माँ की ममता को समझो यार।
कल्याणी है ना...
प्रकृति का मं...
उत्तर प्रदेश ...
वोट है जरूरी
ऊंट किस करवट ...
खेला होवे ?
चलें प्रकृति ...
माँ का आशीर्व...
घर में बीते ब...
क्या कहूँ?
सो गयी है रूह जिनकी उनको आवाज देते क्यूं हो! सो गयी है रूह जिनकी उनको आवाज देते क्यूं हो!
कौन कहता है कि इंसान परिंदे में तब्दील नहीं हो सकता कौन कहता है कि इंसान परिंदे में तब्दील नहीं हो सकता
दीया ये मन की आस का सफलता के दृढ़ विश्वास का दीया ये मन की आस का सफलता के दृढ़ विश्वास का
सुरमई कजरारी वो आँखें नूरानी, आँखें थी जिनमें भरी जिंदगानी। सुरमई कजरारी वो आँखें नूरानी, आँखें थी जिनमें भरी जिंदगानी।
पहलू से उठकर जाते हो ऐसे क्यूं यार सितम देते हो। पहलू से उठकर जाते हो ऐसे क्यूं यार सितम देते हो।
मुस्कान खिला करती है मुस्कान खिला करती है
निर्दयी समाज कभी इन्हे शर्मसार करता है निर्दयी समाज कभी इन्हे शर्मसार करता है
पी कर हलाहल मैंने उसे मुस्कुराते देखा है! पी कर हलाहल मैंने उसे मुस्कुराते देखा है!
अपना ग़म कल मैंने आसमाँ को क्या बता दिया। पूरे शहर ने आज बरसात का लुत्फ उठा लिया। अपना ग़म कल मैंने आसमाँ को क्या बता दिया। पूरे शहर ने आज बरसात का लुत्फ उठा लि...
इसलिए शायद मैं तेरे भीतर की गलियों में भटकता रहता कभी किनारे पर ना जाने के लिए, इसलिए शायद मैं तेरे भीतर की गलियों में भटकता रहता कभी किनारे पर ना जाने के ल...
ए कोरोना ज़रा बता ए कोरोना ज़रा बता
जिस दिन भी आत्मा होगी, उस दिन परमात्मा भी होंगे। जिस दिन भी आत्मा होगी, उस दिन परमात्मा भी होंगे।
मेरे अंदर दो इंसान है एक खुश है और एक परेशान है । मेरे अंदर दो इंसान है एक खुश है और एक परेशान है ।
यादों में एक गुलाब जो था खिला मुरझा गया है वो जो टूट गया । यादों में एक गुलाब जो था खिला मुरझा गया है वो जो टूट गया ।
उलझा रखकर मेरी पसंद के रंगों की, फुलवारियां बनाकर उन्हें प्रतिदिन सींचना! उलझा रखकर मेरी पसंद के रंगों की, फुलवारियां बनाकर उन्हें प्रतिदिन सींचना!
तुम हो अपने गुरूर में जो हुस्न पे हो इतराते! तुम हो अपने गुरूर में जो हुस्न पे हो इतराते!
जिंदगी में फिर ऐसे मोड़ आते हैं, जहां से बच्चे मां बाप को ना पीछे देख पाते हैं। जिंदगी में फिर ऐसे मोड़ आते हैं, जहां से बच्चे मां बाप को ना पीछे देख पाते है...
वक्त से आज मेरा, दोस्ताना बढ़ा है। वक्त से आज मेरा, दोस्ताना बढ़ा है।
तन्दुरूस्ती बढ़ाना है, संतुलित आहार ही खाना है। तन्दुरूस्ती बढ़ाना है, संतुलित आहार ही खाना है।
जब स्कूल जाता था, कि आज छुट्टी हो जाए, पर दुआ है मेरी भगवान से , कि ऐसा समय कभी न आ जब स्कूल जाता था, कि आज छुट्टी हो जाए, पर दुआ है मेरी भगवान से , कि ऐस...