STORYMIRROR

Dr Lalit Upadhyaya

Abstract

2  

Dr Lalit Upadhyaya

Abstract

प्यार को समझो यार

प्यार को समझो यार

1 min
186

जब मैं नहीं होता तब वो रोती,

अँखियों में भर लाती आंसू के मोती।


सबको खाना खिलाकर तब वो सोती,

माँ ही ऐसी हमारी होती।


माँ का यही है प्यार,

नहीं चुका सकते उधार,


भव सागर के जाना है पार,

माँ की ममता को समझो यार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract