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Yogesh Suhagwati Goyal

Romance


5.0  

Yogesh Suhagwati Goyal

Romance


प्यार का इजहार भी जरूरी है

प्यार का इजहार भी जरूरी है

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जुबां पे ताला क्यों, अपने एहसास बताना जरूरी है

प्यार करने के साथ प्यार का इजहार भी जरूरी है


जब प्यार से नहीं चूके तो इजहार में संकोच क्यों

गर एक बार कह दिया, दोबारा कहने में देरी क्यों

जैसे उत्पाद की जानकारी को, दूकानदारी जरूरी है

प्यार करने के साथ प्यार का इजहार भी जरूरी है


सिर्फ प्रेमिका या पत्नी से इजहार की मजबूरी क्यों

परिवार के सदस्य, रिश्ते या मित्रों से ये दूरी क्यों

रिश्तों में मिठास रखने को, सींचते रहना जरूरी है

प्यार करने के साथ प्यार का इजहार भी जरूरी है


गर तुम्हारे इजहार से किसी का चेहरा खिल जाये

मन में चल रही दुविधा का, समाधान मिल जाये

अपने प्यार से प्यार छुपाना, ये कैसी मजबूरी है

प्यार करने के साथ प्यार का इजहार भी जरूरी है


कब वक़्त का मिजाज बदले, और साथ छूट जाये

न जाने कोई अपना कब, किस बात पर रूठ जाये

इंतज़ार किये बिना दिल की बात बताना जरूरी है

प्यार करने के साथ प्यार का इजहार भी जरूरी है 


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