anuradha nazeer
Tragedy
एक बार जब मैं तुमसे मिला था
तो मुझे तुमसे प्यार हो गया था
तुम मुझे छोड़कर किसी
और के साथ चली गयी
मैं टूट रहा हूँ।
मेरा जीवन उसी के साथ समाप्त
हो चुका है।
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
असत्य को छोड़कर, सत्य शिव ज्ञात कर। युद्ध कर, युद्ध कर, स्वयं से युद्ध कर।। असत्य को छोड़कर, सत्य शिव ज्ञात कर। युद्ध कर, युद्ध कर, स्वयं से युद्ध...
एक और दिन गुज़रा है हर दिन की तरह जहाँ किसी को नहीं किसी की परवाह, एक और दिन गुज़रा है हर दिन की तरह जहाँ किसी को नहीं किसी की परवाह,
हमने कहा प्रिय - आओ दिवाली मनाएं। हमने कहा प्रिय - आओ दिवाली मनाएं।
कुछ कहने से क्या रुक जाती वह एक बार जिंदगी जो नसीब से रुठ चली। कुछ कहने से क्या रुक जाती वह एक बार जिंदगी जो नसीब से रुठ चली।
सुबह उठकर सबके लिए भोजन पकाएगी, खुशबू से भले ही उसकी क्षुधा जाग जाएगी। सुबह उठकर सबके लिए भोजन पकाएगी, खुशबू से भले ही उसकी क्षुधा जाग जाएगी।
एक दूसरे का नाश करने लग जाता हैं एक दूसरे को निंदा करने लग जाता हैं एक दूसरे का नाश करने लग जाता हैं एक दूसरे को निंदा करने लग जाता हैं
बंद करवा दो, अब यह आईपीएल जिसने छीना हमारी टीम का बल बंद करवा दो, अब यह आईपीएल जिसने छीना हमारी टीम का बल
तेरा वजूद जो खोया,जी करता है जीवन दरिया में डूब मरने को। तेरा वजूद जो खोया,जी करता है जीवन दरिया में डूब मरने को।
जहां रोज मंदिर मस्जिद तो बनते हैं लेकिन विद्यालय और अस्पताल का तो कुछ नहीं जहां रोज मंदिर मस्जिद तो बनते हैं लेकिन विद्यालय और अस्पताल का तो कुछ नहीं
गुलामी आज भी मन के किवाड़ें खटखटाता है। गुलामी आज भी मन के किवाड़ें खटखटाता है।
लेकिन जहां मतलब सिद्ध हो सकता है वहाँ इंसान की इंसानियत का भंगड़ा है लेकिन जहां मतलब सिद्ध हो सकता है वहाँ इंसान की इंसानियत का भंगड़ा है
मैं लगी हूँ सुलझाने को कुछ हड़बड़ी सी हो गयी है आँखों में आज फिर मैं लगी हूँ सुलझाने को कुछ हड़बड़ी सी हो गयी है आँखों में आज फिर
ना हो काबिल, ना ही पढ़ी-लिखी चाहिए । बहू नहीं इनको तो, कठपुतली चाहिए।। ना हो काबिल, ना ही पढ़ी-लिखी चाहिए । बहू नहीं इनको तो, कठपुतली चाहिए।।
जो मन के तम को हर डाले उसे बात निराली कहते हैं। जो मन के तम को हर डाले उसे बात निराली कहते हैं।
बचपन उसका बीत रहा था, हमेशा खौफ के साए में बचपन उसका बीत रहा था, हमेशा खौफ के साए में
साँसे हाँ साँसे...! बस वही चल रही हैं. साँसे हाँ साँसे...! बस वही चल रही हैं.
धरती का सीना चीरकर,खून -पसीना जलाकर, हर मौसम की मार झेलकर,फसल को उगाकर। धरती का सीना चीरकर,खून -पसीना जलाकर, हर मौसम की मार झेलकर,फसल को उगाकर।
दोगले मानदंडों का दंड हर बार तेरी बेटियाँ ही पाती हैं....? दोगले मानदंडों का दंड हर बार तेरी बेटियाँ ही पाती हैं....?
सारी जिंदगी और जीता इंसान भी मानो जिंदा लाश होता है. सारी जिंदगी और जीता इंसान भी मानो जिंदा लाश होता है.
पुनीत के जाने से यूं लगा, दीप गया रोशनी छोड़ है। पुनीत के जाने से यूं लगा, दीप गया रोशनी छोड़ है।