STORYMIRROR

Tr Shama Parveen

Classics

4  

Tr Shama Parveen

Classics

प्यार है ही नही ज़माने में

प्यार है ही नही ज़माने में

1 min
301

प्यार है ही नही ज़माने में

क्यूं लगें हम उसे मनाने में

याद आने की कोशिशें मत कर

हम लगें हैं तुझे भुलाने में


इतना शक प्यार में नही अच्छा 

जान ले लोगे आजमाने में

इसकी ईंटों में है लहू मेरा

क्यूं लगे हो ये घर गिराने में


सामने आके कुछ कहो वरना

बात निकलेगी मुंह छुपाने में

ख़त्म कर दीजिए ये गुस्सा अब 

रात गुजरेगी क्या मनाने में


घर में शम्मा है रोशनी के लिए

क्यूं लगे हो इसे बुझाने में

लोग क्यूं इतना सोचते हैं शमा

मंजिलों का पता बताने में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics