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गुॅंजन कमल

Romance

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गुॅंजन कमल

Romance

पूर्णिमा की रात

पूर्णिमा की रात

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पूर्णिमा    की  रात में

चलों कुछ देर साथ चलें

कहीं पर साथ बैठें और

एक-दूसरे से बात करें


    तन      और     मन      दोनों      से     ही

   अपने  इस  अधूरे  रिश्ते   को स्वीकार   करें

     पलको के किनारों पर झूल रही  स्मृतियों को

    चलो  एकबार  फिर से याद   करें ।


पूर्णिमा के इस चमकीले उजालों में

सर्दियों    की   इन  सर्द    रातों   में

साथ गुजारे उन बेशकीमती लम्हों को

हम-दोनों मिलकर दिल में आबाद करें ।

                                            



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