STORYMIRROR

Arpan Kumar

Abstract

3  

Arpan Kumar

Abstract

पुरुषत्व

पुरुषत्व

1 min
351

अंकुराया था

मेरा पुरुष

जिस दिन पहली बार


एक नदी उतरी थी

मेरे अन्दर उस दिन

पूरे वेग से अपने


दुनिया की

सारी नदियों से तेज़

बह रही है


वह नदी

मेरी कविता में

तभी से।


இந்த உள்ளடக்கத்தை மதிப்பிடவும்
உள்நுழை

Similar hindi poem from Abstract