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Phool Singh

Inspirational

4  

Phool Singh

Inspirational

पुरुषोत्तम श्री राम

पुरुषोत्तम श्री राम

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4


श्री राम के जैसा चरित्र न मिलता 

चाहे ढूंढ लो इस जहान में

मर्यादा की जो साक्षात मूर्ति, न उनसे बड़ा कोई ज्ञान में।।


शिव का क्रोध और दुर्गा-सी शक्ति

हनुमान सी भक्ति राम में 

आकर्षण जिनका श्री कृष्ण के जैसा, सत्य-धर्म सी सरलता राम में।।


बुद्ध, महावीर-सी दया-करुणा

शौर्यता भी होती राम में

त्याग, प्रेम भावना यीशु जैसी, परशुराम-सी योग्यता राम में।।


पुत्र, स्वामी हर सुख-दुख के साथी 

समानता की भावना राम में 

सूर्य जैसा तेज है जिनका, चंद्रमा-सी शीतलता राम में।।


वही बिगाड़े वही संवारे

विधना, विधाता की नीति राम में

कालसमय को वही चलाते, सब अवतार का रूप है राम में।।


श्री राम के हृदय शिव-शंकर रहते

शिव खोए है राम में 

ये ईश्वर के दो स्वरूप कहलाते, भक्त भेद न करते शिव-राम में।। 


राममयी आज दुनियां सारी

ऐसा आकर्षण है प्रभु राम में 

दो अक्षरों का ये नाम है सुंदर, सारा जग समाया राम में।।


कण-कण में श्री राम ही बसते

सब जीव समाते राम में 

राम आत्मा राम परमात्मा, सब ध्यान लगाते राम में।।


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