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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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पुरानी यादें

पुरानी यादें

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हर वक्त छाई रहती है ,

मानस पटल पर ,पुरानी यादें ,

कुछ अच्छे कुछ बुरे लम्हे,

कुछ सच्ची कुछ झूठी सी,।


खुद पे तरस आता है

याद कर पुरानी यादों को ,

बेवजह उलझा रहा तमाम जिंदगी,

इन खुराफाती ख्वाबों में,


होना वही है जो मुकद्दर में लिखा है ,

और हम खुद से ही लड़ते रहे ,

खुद की कमियां अब याद आती हैं

पुरानी यादें अब सताती हैं,


तमाम उम्र हम दूसरों पर ,

अपनी खुशियां लुटाते रहे ,

वही लोग मुझे देख कर ,

पागल समझ हंसते रहे,।।



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