Chetan Gondaliya
Inspirational
पतंग और पवन
एक ही चीज़ सिखाए
एक दूसरे को गर
हम रास आए,
हमारे हाथ आकाश आए !
निवृत्त सेनान...
सबसे सच्चा और...
सफर जारी है.....
सूख लगे...
फ़ुरसत
समय बहरा होता...
जरूरी था...
सीख लो..
किये होंगे...
मुझे आता है बस अभिनय करना रिश्तों के चरित्र में ढलकर… बँट जाना घर के कमरों की तरह जिस कमरे में जाओ उ... मुझे आता है बस अभिनय करना रिश्तों के चरित्र में ढलकर… बँट जाना घर के कमरों की तर...
एक अजीब सी पागल है एक अजीब सी पागल है
लाखों पीड़ा ह्रदय में समेटे तुम सब का बिहार हूँ मैं! लाखों पीड़ा ह्रदय में समेटे तुम सब का बिहार हूँ मैं!
उन खुशियों को जिनके पास कुछ ना होते हुए भी उनकी खिलखिलाहट बादलों से परे है। उन खुशियों को जिनके पास कुछ ना होते हुए भी उनकी खिलखिलाहट बादलों से परे ...
भोर - सी आस...। भोर - सी आस...।
ज़रा से प्यार को भी बहुत समझो और सामने वाले से मिली उपेक्षा को भी मत सहो ज़रा से प्यार को भी बहुत समझो और सामने वाले से मिली उपेक्षा को भी मत सहो
गाने बन गए, मूवी बन गई; कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए... गाने बन गए, मूवी बन गई; कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए...
तुम दर्द को मुस्कराहट में दबा दो, तुम हर गम को दिल से हटा दो। तुम दर्द को मुस्कराहट में दबा दो, तुम हर गम को दिल से हटा दो।
नवलेखकों का अंग्रेजी के तरफ बढ़ता प्रेम मान्य है परंतु हिंदी से प्रेम ना कर पाना उचित नहीं । - विद्रो... नवलेखकों का अंग्रेजी के तरफ बढ़ता प्रेम मान्य है परंतु हिंदी से प्रेम ना कर पाना ...
कहानी थी, अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा I कहानी थी, अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा I
जो अँधेरा मुझे निगल गया था वही मेरी बच्ची के भविष्य की ओर बढ़ रहा था लेकिन अब मेरे विद्रोह के ज्वाल... जो अँधेरा मुझे निगल गया था वही मेरी बच्ची के भविष्य की ओर बढ़ रहा था लेकिन अब म...
कर सकूँ कुछ ऐसा...। कर सकूँ कुछ ऐसा...।
भावों को शब्दों में भरकरपन्नों पर बिखराते हैं जोबंजर मन में नेह-सुमन कीनूतन पौध लगाते हैं जो भावों को शब्दों में भरकरपन्नों पर बिखराते हैं जोबंजर मन में नेह-सुमन कीनूतन पौध ...
समाज की जलती सोच का आलिंगन कर, मैं चल पड़ा हूँ बेफिक्र, इस जीवन पथ पर। समाज की जलती सोच का आलिंगन कर, मैं चल पड़ा हूँ बेफिक्र, इस जीवन पथ पर।
क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह कविता...। क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह कविता...।
ना जाने कैसे उसकी माँ रात भर सोए होगी, उसके सीने में गोली लगने से पहले वो रोई होगी। ना जाने कैसे उसकी माँ रात भर सोए होगी, उसके सीने में गोली लगने से पहले वो रो...
जीवन...। जीवन...।
पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है। पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है।
मुस्कराकर अपनी ही ख्वाहिशों को तोड़ देता है शायद उसे ही पिता कहते हैं। मुस्कराकर अपनी ही ख्वाहिशों को तोड़ देता है शायद उसे ही पिता कहते हैं।
भारत के वीर सपूत,देश हित जान गंवाई अपनी जान दी कभी गर्दन नहीं झुकाई। भारत के वीर सपूत,देश हित जान गंवाई अपनी जान दी कभी गर्दन नहीं झुकाई।