STORYMIRROR

Krishna Bansal

Inspirational

3  

Krishna Bansal

Inspirational

पतझड़

पतझड़

1 min
162

मैं कहती हूं 

जीवन में पतझड़ आने दो 

वे सब जो व्यर्थ है 

झड़ झड़ जाने दो 

मैं कहती हूं 

जीवन में पतझड़ आने दो।


पतझड़ की हर आहट पर 

क्यों द्वार बंद करते हो 

पतझड़ की हर खटखट पर 

क्यों खिड़कियों के परदे गिराते हो

पतझड़ के हर बुलावे को 

कब तक नकारोगे 

कब तक आँखें बंद करोगे 

कबूतर बन

कब तक सिकोड़ोगे

हाथ पाँव कछुआ बन।


उठो स्वागत करो 

मैं कहती हूं 

जीवन में पतझड़ आने दो।


झड़ेगा नहीं तो नया कहां से

फूटेगा समझो इस बात को 

पतझड़ नियति है

इस दुनिया की 

हर चीज़ की।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational