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Monica Pandey

Abstract

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Monica Pandey

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पति का व्यक्तित्व

पति का व्यक्तित्व

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पर्वत सा विस्तृत तुम्हारा व्यक्तित्व

सदा छा जाता रहा हैै मुझ पर

उसकी छाया में ,मैं अपने को 

कभी देख नहींं पाई

जब देखा तो लगा की

वक्त बहुत बीत चुका है

मेरा अक्स अब हो चला है धुंधला

जिससे अब मुझे यह छांव ही

भली लगने लगी है

 मुक्ताकाश से अब मैं डरती हूं

हर वक्त यही छाया खोजती रहती हूं

क्योंकि सीधी धूप की अब आदत नहीं 

और यह धुंधलाा अक्स ही अब मेरी पहचाान है।


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