STORYMIRROR

डॉ. अरुण कुमार निषाद

Tragedy

3  

डॉ. अरुण कुमार निषाद

Tragedy

पर्यावरण

पर्यावरण

1 min
225

हमारा जीवन

रहन-सहन

सब

निर्भर है

हमारे

पर्यावरण पर

जैसा बोओगे


वैसा ही

कटोगे

इसलिए

अभी से ही

चेत लो


मत करो

खिलवाड़

पर्यावरण से

अगर इसने

दिखलाया


अपना

विकराल रुप

तो सोचो

क्या होगा

कल्पना करो

कोरोना के

रुप में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy