डॉ. अरुण कुमार निषाद
Tragedy
हमारा जीवन
रहन-सहन
सब
निर्भर है
हमारे
पर्यावरण पर
जैसा बोओगे
वैसा ही
कटोगे
इसलिए
अभी से ही
चेत लो
मत करो
खिलवाड़
पर्यावरण से
अगर इसने
दिखलाया
अपना
विकराल रुप
तो सोचो
क्या होगा
कल्पना करो
कोरोना के
रुप में।
प्रणय
जिन्दगी
पर्यावरण
ग़ज़ल
जल संकट
विक्रिया
बींध कर रक्त तीर, भीरु करे लक्ष्यसिद्ध बींध कर रक्त तीर, भीरु करे लक्ष्यसिद्ध
यह कविता एक बिछड़े हुए प्रेमी के दिल का हाल सुनाती है। यह कविता एक बिछड़े हुए प्रेमी के दिल का हाल सुनाती है।
हर तूफ़ान को मोड़ती रही... मगर अब, बहुत थक गयी हूँ… आज फिर, बहुत याद आ रही हो… कहाँ ढूँढूँ तुम्हें… क... हर तूफ़ान को मोड़ती रही... मगर अब, बहुत थक गयी हूँ… आज फिर, बहुत याद आ रही हो… कह...
जब अपने ही होने को बहुमत के स्वर में स्वर मिला वो खुद को नकारने लगे तब ? जब अपने ही होने को बहुमत के स्वर में स्वर मिला वो खुद को नकारने लगे तब ?
बस लूट पाट की झूठ फ़रेब की खबरें आती हैं अख़बार में । बस लूट पाट की झूठ फ़रेब की खबरें आती हैं अख़बार में ।
यह कविता गरीबी की सच्चाई दिखाती है। यह कविता गरीबी की सच्चाई दिखाती है।
डूबते को केसे एक तिनका सहारा देता है यह कविता दर्शाती वही दर्शाती है। डूबते को केसे एक तिनका सहारा देता है यह कविता दर्शाती वही दर्शाती है।
क्या गलती मैंने की ,तुम पर विश्वास किया। क्या गलती मैंने की ,तुम पर विश्वास किया।
दो हज़ार के नोट में तुरंत थाना छेत्र बादल जाता है दो हज़ार के नोट में तुरंत थाना छेत्र बादल जाता है
जाने उस रात किसने किसका क़त्ल किया जाने उस रात किसने किसका क़त्ल किया
कोरे पन्ने पर काली स्याही छिटक देना कोरे पन्ने पर काली स्याही छिटक देना
तूटे हुए दिल की आवाज़। तूटे हुए दिल की आवाज़।
जुल्म नहीं होता धर्म से, जुल्म नहीं होता जात से जुल्म नहीं होता धर्म से, जुल्म नहीं होता जात से
दुआ मे भले ही न सही पर बद्दुआओं में तो याद किया ही होगा वेश्या, तवायफ़ और ना जाने क्या-क्या कहके हम... दुआ मे भले ही न सही पर बद्दुआओं में तो याद किया ही होगा वेश्या, तवायफ़ और ना जा...
यह कविता प्रेमी हृदय की वेदना को दर्शाती है । यह कविता प्रेमी हृदय की वेदना को दर्शाती है ।
'उसने हमें छोड़ा, हमनें प्यार को, और कर बैठे खुद से रुसवाई, वक्त जैसी फितरत थी उसकि, ना ठहरी ना हाथ आ... 'उसने हमें छोड़ा, हमनें प्यार को, और कर बैठे खुद से रुसवाई, वक्त जैसी फितरत थी उस...
सच कहा तुमने मुझसे मेरी तुम नही ये कहानी शहर भर मे मशहूर है सच कहा तुमने मुझसे मेरी तुम नही ये कहानी शहर भर मे मशहूर है
शहर की रौनक भी अधुरी लगती है दिन दिवाली के जब नगरी सजती है शहर की रौनक भी अधुरी लगती है दिन दिवाली के जब नगरी सजती है
एक कवि मरता नहीं ,लेकिन हम उसे मार देते है ,उन्हें भुला कर। .... एक कवि मरता नहीं ,लेकिन हम उसे मार देते है ,उन्हें भुला कर। ....
पर हाय तुम्हारा ये बाप अभागा, कुछ भी तो न मैं कर सका,जिस गोद में खेली थीं, अंत भी उसी की गोद में हुआ... पर हाय तुम्हारा ये बाप अभागा, कुछ भी तो न मैं कर सका,जिस गोद में खेली थीं, अंत भ...