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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

पर्व कुर्बानी का

पर्व कुर्बानी का

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आज के दिन पर्व आया है, कुर्बानी का

काम छोड़ भी दो, सब लोग शैतानी का

घमंड, अहंकार, की दे, दो, आप कुर्बानी

मेरी बात मान लो, सब ही हिंदुस्तानी


फिर नाम याद नही आयेगा, नानी का

जब वक्त होगा, कयामत रात रानी का

जो दुनिया मे खुदा का नाम लेनेवाले है

उन पर बस न चलता, शैतान शैतानी का


चाहे तुम्हे कोई चीज कितनी प्यारी हो

गर ईबादत में अल्लाह ने उसे मांगी हो

फिर एकपल न जाया करो, कुर्बानी का

जैसे इब्राहीम ने सबूत दिया, वफ़ादारी का


हंसते हुए, बेटे इस्माईल की कुर्बानी दे दी,

नाम न लिया आंखों ने, जरा भी पानी का

फिर देखो चमत्कार, अल्लाह मेहरबानी का

वहां रह गया, बस निशां अज निशानी का


तब से मनाते, पर्व ईदुलजुहा कुर्बानी का

सबको मुबारक पर्व ईदुलजुहा, कुर्बानी का।


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