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Akanksha Gupta (Vedantika)

Abstract

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Akanksha Gupta (Vedantika)

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प्रकृति की पुकार

प्रकृति की पुकार

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यह प्रकृति की पुकार है

क्यो मचा यह हाहाकार है


जीवन पर जो संकट आया

जाने कितना गहरा है


प्रकृति का रूप यह निखरा

हलचल पर जो पहरा है


आज फिर प्रकृति के चेहरे पर

एक खिलखिलाहट आयी हैं


अब खुलकर सांस ले रही

एक नीरवता छाई है


अब समझना होगा सबको

प्रकृति से संसार है

यह प्रकृति की पुकार है।


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