प्रकृति का मिलन
प्रकृति का मिलन
फूलों की खुशबू से महक रहा उपवन
चिड़ियों के कलरव से चहक रहा कानन
तितलियों के रंग बिखरने लगे हैं
पक्षी आसमान की तरफ उड़ने लगे हैं
पलाश के फूलों ने गुलाबी रंग बिखेरा है
बया के घोंसले ने सुनहरा रंग बिखेरा है
आम और नीम के पेड़ों पर कोयल गीत गाती है
ध्यान से सुनो ! वो जो छम - छम की आवाज़ आती है
मोरों ने ख़ुशी में जम कर जब पैर थिरकाए हैं
अप्सराओं ने भी आसमान से फूल बरसाए हैं
तोता -मैना की पीहू-पीहू , कोयल की कुहू -कुहू
ने संगीत की महफ़िल सजाई है
झूम रहे हैं पेड़ और पौधे , पक्षी नीड़ों में गाते हैं
प्यार से महसूस करो, बज रही शहनाई है
शेर की गुर्राहट भी सुन लोगे , हिरन की किलकारी भी
खरगोश की चाप और चूहे की कट -कट भी
बिल्ली की ' म्याऊं ' भी और कुत्ते की ' भौ -भौं ' भी
बहुत ही सुन्दर है प्रकृति का मिलन !
अति -सुन्दर हैं हमारे वन और उपवन !
