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Phool Singh

Tragedy Inspirational

4  

Phool Singh

Tragedy Inspirational

परिवार का मुखिया

परिवार का मुखिया

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कभी इधर से कभी उधर से 

दर-दर से वो ठोकर खाया 

दुनियाँ उसको समझ सकी न  

न परिवार को ही वो समझ में आया।।


मौज करें परिवार सदस्य 

मेहनत से खूब धन कमाया 

बाल बच्चों के पालन पोषण हेतु

जीवन अपना यूं ही गँवाया।।


बड़े हुए जो बच्चे उसके 

पर इच्छाओं में उनकी कमी न लाया 

मन की अपने मन में रखकर 

कभी न अपना दुख जताया।।


कठिनाई चाहे जितनी आई 

सहन खुद कर चला 

परिवार के संग वक़्त बिताएँ वो कैसे 

अधिकतर काम ही उसके हिस्से आया।।  

  

कभी खुदगर्ज, कभी कंजूस  

कितने दोषों का सरताज कहलाया 

कठोर, कभी दंभी शब्द से उसे नवाजा

सदा, कठिन जीवन मुखिया ने पाया।। 


त्याग, बलिदान सब भूल के उसके 

कमियाँ उसकी हर शख्स दोहराया  

समझे कोई न उसकी भावना

अपने कठिन परिश्रम जिसने घर बनाया।।


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