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Meena Mallavarapu

Inspirational

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Meena Mallavarapu

Inspirational

परिणाम

परिणाम

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      कर्म का परिणाम न हो

       है नहीं यह मुमकिन 

      परिणाम तो है अनिवार्य 

       आज नहीं तो कल

      कल नहीं तो वर्षों बाद 

       प्रत्यक्ष या परोक्ष -

     कर्म के हिसाब का चुकता

        तो करना ही होगा 


     दुष्कर्मी का न छोड़े पीछा

     परिणाम ,उसके पीछे पीछे

     लगा रहे तब तक,जब तक 

     उसके साथ पूरा न कर ले 

     हिसाब-किताब पाई पाई का

      स्वर्ग नर्क देखा है किसने

     मगर नर्क की यातनाओं से

       हो जाता है परिचय 


  अपने किए का लेखा जोखा है सामने- 

    ज़िन्दगी के हैं अपने ही उसूल,

  परिणाम हैं निश्चित ,न छोड़ेगी ऐसे ही

    बदला दूर नहीं,रहम की बिल्कुल 

  गुंजाइश नहीं -- है डोरी उसके हाथ।

     ग्लानि ही है उसका हथियार 

  तलवार की नोक बन लटकती सर पर

         सुबहो शाम।


  ग्लानि कर दे जीना दूभर ,है यह काफ़ी 

    अकेली ही,कड़ी से कड़ी सज़ा 

  थोपने के लिए उस पर जिसने न किया

    सम्मान ,जीवन की गरिमा का

अनगिनत रूप लिए करती उसे विचलित-

    विचलित ,व्यथित, दुखी कभी

भयभीत कभी, लेने न दे पल भर चैन उसे

   खुद को ही अब पहचान न पाए


  सह पाएगा कब तक इतना भारी बोझ

    छिन जाए जब रातों की नींद 

   खो जाए दिन का चैन सुकून 

     वह इन्सान जिसने किया 

  औरों को दुखी-

     परिणाम उन आघातों का

 उन अनगिनत आघातों का है झेलना

   आज,अभी-नहीं विकल्प कोई!


  सत्कर्म करने वाले करते हैं विश्वास 

    नेकी में, दिलों को जोड़ने में-

   औरों की खुशियों में होते खुश

      आते औरों के काम

    बनते उनके मुस्कान की वजह

     आगे बढ़कर थामें उनको

    जिनको है सहारे की दरकार

     उनका है बस स्वर्ग यहीं


   नहीं परिणाम की ओर नज़र 

      कर्म ही उनका कर्तव्य 

   कर्म ही उनका ध्येय

      प्रतिफल है चैन की नींद-

   कहां कहां जाकर ढूंढें 

       स्वर्ग और नर्क

   है सामने अपने दोनों विकल्प 

     चयन है अपना हक़।

 


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