STORYMIRROR

Mamta Rani

Romance

4  

Mamta Rani

Romance

प्रेमिका

प्रेमिका

1 min
247

 

मासूम सी खिलखिलाती कोई कली हो तुम

दिल की बहारों में छायी वो दिल्लगी हो तुम


तुम्हारी वो काली घनी जुल्फों का नजारा

जिसे देखकर खो जाये ये आशिक़ आवारा


तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान क्या गजब ढाती है

चेहरे पे हँसी और होठों पे लाली छा जाती है


चेहरे पे सादगी और सच्चाई जैसी हो तुम

चाय में घुली मिठास की प्याली हो तुम


वो माथे की बिंदी वो आँखों का काजल

वो कानों की झुमके कर देते हैं घायल


प्रेमिका बनके आयी तुम जब मेरे जीवन में

खिल गया जीवन मन तरंगों के बगियन में


तुम्हारी भोली भाली सूरत बसी है ऐसी मन में

जिंदगी भर भी ना भूले इस पूरे ही जीवन में


तुम्हारी वो नटखट अदाएँ वो अलहड़पन 

मेरे हर अंश में बस गया है तेरा पागलपन!


        


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance