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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

प्रेम

प्रेम

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प्रेम वही जो प्रेमी को राह सही दिखलाए,

प्रेम नहीं जो प्रेमी को राह से भटकाए।


प्रेम कहां जो प्रेमी पे, हक केवल जतलाए,

प्रेम साथ में अपने तो, ज़िम्मेदारी लाए।


प्रेम वही जो गहन अंधेरे, को रोशन कर जाए,

सड़कों पे भटकते को, मंज़िल की राह बताए।


प्रेम नहीं है भ्रम के पहाड़ों की चढ़ाई,

प्रेम के हर अक्षर में, छिपी है सच्चाई।


प्रेम नहीं है झील सा, सीमाओं पे ठहरा,

बनता सागर, ना पाएं लहरों पे हम पहरा।


प्रेम कभी हमें बनाए ना दावेदार,

साथ चलना है चाहे, राह हो कांटेदार।


प्रेम नहीं जो महलों के, सपने है दिखलाए,

देख दरार वह तो घर की, छत है बन जाए।


प्रेम नहीं जो प्रेमी से बातों को छिपाए,

प्रेम है वो, जो सच्चाई का आईना बन जाए।


प्रेम कहां पर केवल प्रेम गीत को गाता है,

सुख दुःख में ये खुद, गीत इक बन जाता है।


प्रेम वही जो अटूट रहे, हर स्थिति में निभ जाए,

हृदय में जो बसा रहे, वही सच्चा प्रेम कहलाए।


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