प्रेम प्रकाश
प्रेम प्रकाश
तू ज़िंदगी है या ज़रूरत,
या सुंदर सी कोई मुरत।
प्रेम प्रकाश में मैं तर जाऊँ,
या तुझको ख़ुद में मैं भर जाऊँ।
सीने से लगा हर वक़्त,
तुझको मैं जब-जब पाऊँ।
हर एक साँस ज़िंदगी की,
इज़ाफ़ा मैं करता ही जाऊँ।
फिर चाहे दर्द ही क्यों न हो,
हर तरफ़ अंधकार ही क्यों न हो,
हाथ जोड़ उजालों से,
लड़ लेंगे हम अंधेरों से।
