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Swati Grover

Abstract

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Swati Grover

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प्रेम नहीं किया

प्रेम नहीं किया

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हम तुम मोह-माया के बंधन में बँध गए 

कदाचित् प्रेम नहीं किया

जहाँ मिलन कम, विरह ज्यादा है

इतनी नेह की परकाष्ठा है

श्याम से पहले नाम आता राधा है

बाबा फ़रीद की जिस दिन 

ख़ुदा से बात नहीं होती थीं

उस दिन उन्हें नींद नहीं आती थीं

बुल्लेशाह का इश्क़ उन्हें नचाता रहा

वो दिवाना अपने रूठे महबूब को

समझाता रहा, रिझाता रहा, मनाता रहा,

गौरी को सोता देख,

अमीर खुसरो मायूस हो गए

सदा के लिए दुनिया से विदा हो गए

गर हमने कोई बात नहीं की

तुमने भी पहल नहीं की।

एक दूसरे के शब्दों का हिसाब रखा

अपने अहं को अहम् रखा 

तेरा कहते-कहते स्वार्थी बन गए

शायद इसलिए 

हम तुम मोह-माया के बंधन में बँध गए 

कदाचित् प्रेम नहीं किया।।।

कदाचित् प्रेम नहीं किया।।।



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