STORYMIRROR

Kishori Mohini panigrahy(B.Sc,B.Ed)

Fantasy

3  

Kishori Mohini panigrahy(B.Sc,B.Ed)

Fantasy

पिता

पिता

1 min
164

खुद की ख़ुशी भुला कर बच्चों को जो खुश रखता है

          वो है पिता।

खुद धूप में जलता है पर बच्चों को छांव में रखता है

         वो है पिता।

खुद भूखा रह कर बच्चों को कभी भूखा नहीं रखता है

         वो है पिता।

बच्चों की खुशी मैं अपना सारा गम भुला देता है

         वो है पिता।

पूरा जीवन संघर्ष कर परिवार को खुश रखता है

         वो है पिता।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Kishori Mohini panigrahy(B.Sc,B.Ed)

Similar hindi poem from Fantasy