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Anita Chandrakar

Inspirational

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Anita Chandrakar

Inspirational

पिता

पिता

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पिता मजबूत सहारा बच्चों के, देते बरगद सी छाया।

बाहर से दिखते सख्त वे, पर भीतर है प्यार समाया।

बच्चे माने या न माने, पिता ने अपना फर्ज़ निभाया।

चलकर काँटों पर खुद, उनकी राहों में फूल बिछाया।

कंधे पर बिठा बच्चों को, सैर दुनिया की करवाते।

होती नहीं कोई कमी, हर मनचाही चीज दिलवाते।

करते दिन रात परिश्रम, दर्द किसी को नहीं बताते।

सागर का गंभीर हृदय, कभी वे आँसू नहीं बहाते।

बैठ पीठ पर खुश होते बच्चे, बनते जब वे घोड़ा गाड़ी।

आँगन भर में दौड़ लगाते, बनकर छुक छुक गाड़ी।

जीवन की हर कठिन डगर में, मिलता पिता का साथ।

खुशहाली रहती पास में, जब सिर पर हो उनका हाथ।

दिन रात मेहनत करके, पूरी करते बच्चों की ख़्वाहिश।

नहीं बताते अपना दुख, चुपचाप सहते हर तपिश।

सबसे सुंदर रिश्ता दुनिया का, धरती पर जैसे ईश।

सहकर दिन भर धूप भी, देते बच्चों को आशीष।

संकट में होते संबल पिता, खड़े हो जाते बनकर चट्टान।

परिवार का सुदृढ़ आधार वे, दिल से करें उनका सम्मान।

मगन हो जाते अपनी दुनिया में, स्वार्थ में डूबकर संतान।

पीड़ा उनकी समझ न पाते, घर बनकर रह जाता मकान।

राह दिखाते दीपक बनकर, नहीं मानते कभी वे हार।

मत भेजो वृद्धाश्रम में उनको, जब वे हो जाये लाचार।

पाल पोसकर जिसने बड़ा किया, उनको भी दें प्यार।

सेवा करके मात पिता की, खुशियों से भर दे संसार।



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