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Kavita Sharrma

Inspirational

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Kavita Sharrma

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फ़लसफ़ा

फ़लसफ़ा

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रोज़ाना की तरह यूं ही कट रही थी जिंदगी

वापस आ रही थी मैं रोज़ की तरह घर की तरफ़

इक बीज़ यूं ही पड़ा था जैसा बड़ा उदास सा था

मेरे कदम जैसे थम से गये सोचा क्यों न इसे रोपा जाए

समय बीता बीज इक पेड़ बन गया था

शाख से पत्तों को जब गिरते हुए देखा

ऊंचाई से गिर ज़मीं को छूते हुए देखा

पेड़ जिंदगी का फ़लसफ़ा समझा देते हैं

ऊंचाइयों को छूते औकात में रहना सिखा देते हैं।


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