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अजय एहसास

Romance Tragedy Classics

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अजय एहसास

Romance Tragedy Classics

पहला प्यार नहीं मिलता

पहला प्यार नहीं मिलता

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हो जाती है शादी जबरन 

दिल का द्वार नहीं खुलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।


मिला साथ ना जीवन भर का 

बस कुछ पल ही साथ रहे 

छूटने में होती है मुश्किल 

जब हाथों में हाथ रहे 

हार गए दुनिया से तो 

बाहों का हार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


है जो अधूरी अपनी मोहब्बत 

आती आज भी ख्वाबों में 

प्यार मोहब्बत की बातें बस 

अच्छी लगे किताबों में 

पाना चाहो जिसको अक्सर 

ऐसा यार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


बन जाता था एक झलक से 

जिसके पूरा दिन अच्छा 

नजर बयां करती थी हकीकत 

प्यार वो था कितना सच्चा 

किसी और से इतना सच्चा 

तो व्यवहार नहीं मिलता

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


मिल कर भी हम एक ना हुए 

कुछ उसकी मजबूरी थी 

दुनिया की थी दीवारें बस 

इसी वजह से दूरी थी 

दुनिया में है लोग बहुत सबसे 

तो विचार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


प्रथम मिलन में ही जब हमने 

इक दूजे को किया समर्पण 

डूब प्रेम में एक दूजे के 

कर डाला सब कुछ अर्पण 

इक दूजे पर अर्पित अब 

ऐसा संसार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


भूलना चाहोगे गर उसको 

भूल ना पाओ जीवन भर 

अपना था जो अपना सा पर 

ला ना पाए अपने घर 

अपनापन था रोम-रोम 

ऐसा खुद्दार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


कहीं आज भी मिल जाए तो 

मन करता देखे जी भर 

नहीं कोई अस्तित्व देह का 

जैसे उसके बिन जी कर 

जीवित हूं या मरा पड़ा 

सांसों का तार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


हम तो कब के बिछुड़ गए थे 

अब बोलो किसकी बारी 

अलग करे जो इक दूजे को 

कैसी ये दुनियादारी 

बिछुड़ों को जो मिला सके 

वो दुनिया दार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


सो जाए तो चैन मिले 

और गर रोए तो आंख भरे 

गुस्से का 'एहसास' सुखद पर 

मौन रहे तो बहुत डरे 

ऐसा प्यार कभी जीवन में 

बारंबार नहीं मिलता 

इस दुनिया में कभी किसी को 

पहला प्यार नहीं मिलता।।


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