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Syeda Noorjahan

Abstract

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Syeda Noorjahan

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फ़ितरत

फ़ितरत

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कोई कैसे जानेगा दिल में क्या रखता हूं

ज़बान पर शहद गले में मिठास रखता हूं


अंदर कोई झांके तो डर जाएगा बेशक

चेहरे पर फ़रिश्ते जैसा प्रभाव रखता हूं


कोई मुकाबला नहीं मेरी चालाकियों का

किसी को क्या मालूम मैं क्या चाहता हूं


सुकून छीन कर खुश होने का मजा है अलग

दुनिया की नज़रों से खुद को बचा रखता हूं


किस की नज़रों में है दम कि मुझसे बचें

नज़र में आए बिना नज़र की कटार रखता हूं


परे रखना मुझसे तुम चाहतों को अपनी

डाल दुं जिस पर नज़र जला के खाक करता हूं


उजालों में रहते हो तभी रोशन सोच है

मैं बासी अंधेरों का अंधेरे साथ रखता हूं


तु चाहे जितने जीत ख्वाब सजा के रखना

जहां तेरी सोच न जाए वहां मात रखता हूं


तुम हो उंचे घराने के तो होंगे अपनी जगह

मैं अपनी बादशाहत का सर पर ताज रखता हूं!



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