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Shweta Chaturvedi

Romance


4.6  

Shweta Chaturvedi

Romance


फिर से तुम्हारी

फिर से तुम्हारी

1 min 415 1 min 415


मैं नहीं जानती कि तुम किस मिट्टी के बने हो

नम हालातों में भी कभी 

तुम्हें टूटते, बिखरते नहीं देखा।


पर मैं तो बादल देखते ही 

बिना बारिश के झट से ढेर हो जाती हूँ।


और जब तुम अपने हाथों की थाप दे कर 

गढ़ देते हो मुझे अपने मन चाहे आकार में, 


तो मैं फिर वैसी ही हो जाती हूँ. 

फिर से तुम्हारी 

सदा, सर्वदा, सदैव के लिये।



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