पहेली सा है प्रेम
पहेली सा है प्रेम
प्रेम के
होने के
बाद
कैसा
होता है
अहसास
अच्छा
लगता है
बुरा
लगता है
पहेली सा
लगता है
अच्छा
और बुरा
दोनों
लगता है
ना अच्छा
लगता है
ना बुरा
लगता है
समझ से
परे होता है
प्रेम का
अहसास
पता नहीं
कैसा होता है
खुद के भीतर
बहुत कुछ
होता है
हलचल
सा होता है
सब कुछ
शांत सा
हो जाता है
पूर्ववत जैसा
होता है
पता नहीं
चलता
कैसा होता है
और अगर
पता नहीं
चल पाता है
बदलाव तो
कैसे भान
होता है प्रेम
एक पहेली
सा है प्रेम।
