STORYMIRROR

Dheeraj kumar shukla darsh

Inspirational

4  

Dheeraj kumar shukla darsh

Inspirational

पग बढ़ाते चलो

पग बढ़ाते चलो

1 min
358

चलो मंजिल की ओर

पग बढ़ाते चलो

करो नये रास्तों की खोज

पग बढ़ाते चलो


मंजिल के मुश्किल मोड़ पर

अविरल पग बढ़ाते चलो

मिलेगी मंजिल निश्चित

पग बढ़ाते चलो


खोजोगे जब रास्ते नये

आयेंगी कई मुश्किलें

हर मुश्किल होगी आसान

मिलेगी राहें भी नयी

बस तुम निरंतर


पग बढ़ाते चलो

जिन्हें भी मिली है 

नयी राहें आज तक

और खोजी है नयी मंजिलें

कारण इतना ही है

निरंतर पग बढ़ाते चलो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational