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jitendra kumar sarkar

Fantasy

4  

jitendra kumar sarkar

Fantasy

पेप्सी पिला रे

पेप्सी पिला रे

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हाय, गर्मी मरा रे, गर्मी की बला

ये गर्मी बुरी बात है

हाय पेप्सी पिला रे पेप्सी वाला

डयू से हसीं रात है


चंदा मामा फटका दे, सूरज ताऊ धधका

ये धधकना बुरी बात है

बाबु भैया बता रे, दूं कैसे चक्मा

कहीं लूं कहीं बरसात है

ये गर्मी बुरी बात है..................


आंधी तुफां की सेटिंग,वह उसका जिया 

ये सेंटिंग गलत बात है

 मोबाइल उठा रे, इंस्टा रील बना

ये मोबाइल से आपात है 


यहां आशियाना बना लूं, धरती को मेरा

यहां छलना गलत बात है 

छांव के पेड़ मत काटे, इक पेड़ आसरा

यहां पेड़ों से ही शीत वात है 

ये गर्मी बुरी बात है....................


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