सपने मत जलाओ
सपने मत जलाओ
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जीवन भर कमाये को
यूं ही लूटाया ना करो।
मेहनत से घर बनाते है
यूं जलाया ना करो ।
मेरे आंसु ना पूछें ठीक
दर्द बढ़ाया ना करो।
ख्वाब सबके ही होते
यूं मिटाया ना करो।
पत्थर -ईंट बटोरी तब
बनाया अपना घर।
आंसु भीगे आंखें नम
रहस्य खोलूं मैं दिनकर।
समंदर की मिलावट में
नहरें डुब जाती है ।
नींव कच्ची हो अपनी तब
आशा छूट जाती है ।
अंधेरी रात होने बाद,
उजाली रात होती है।
झूठ कितना भी पल जाये
सत्य की जीत होती है।
